हेलो दोस्तों आज हम आपको बताएंगे एक ऐसी लड़की के बारे में जो महीने के ₹200000 कमा रही है, बहुत ही कम पैसे से शुरू किया था यह बिजनेस |

क्या आप भी जानना चाहते हैं, की यह लड़की कौन है ? क्या बिजनेस करती है? और कैसे करती है ? अगर आप इस बिजनेस  करना चाहते हैं ? तो कैसे कर सकते हैं? इन सभी सवालों के जवाब आपको देने वाला हुँ, तो आर्टिकल पूरा पढ़े:-

दोस्तों इस लड़की का नाम है पायल अग्रवाल इनका घर उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर के दत्तावली गांव में है | इनके पिता ₹4000 की नौकरी करते थे और इनकी मां ब्यूटीशियन का काम करती थी लेकिन फिर भी इनके माता-पिता ने पढ़ाई में कोई दिक्कत नहीं आने दी |

ये जब  खुद 11वीं कक्षा में थी तो आठवीं और नौवीं कक्षा के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाया करती थी फिर 2016 में इन्होंने B.Tech कंप्लीट की और फिर कुछ नया करने की सोची लेकिन अब उनके मन में एक सवाल था कि क्या किया जाए और कैसे किया जाए ? जब इन्होंने हर सेक्टर में देखा कि किस सेक्टर में जाना चाहिए तो इन्हें आईडिया आया कि क्यों ना एग्रीकल्चर सेक्टर में जाया जाए क्योंकि भारत में जीडीपी के ग्रोथ में एग्रीकल्चर सेक्टर का बहुत बड़ा हाँथ है |

दूसरा कारण था कि इन्हें कम लागत में बिजनेस शुरू करना था और तीसरा कारण था इनका गांव शहर के नजदीक है इसलिए कचरा बहुत ज्यादा होता था | गंदगी बहुत ज्यादा फैली थी | शहरों में गायों के डेयरी वालों को गोबर फेंकने के लिए व्यवस्था नहीं थी इन्हीं सब कारणों से इन्होंने एक बिजनेस करने की सोची, उस बिजनेस का नाम है वर्मी कंपोस्ट बिजनेस (Vermicompost Business)

जी हाँ, दोस्तों आप लोग सोचो की एक इंजिनीरिंग की हुई लड़की खेती के बारे में कैसे सोच सकते हैं, जिसके यहां कभी कोई खेती नहीं हुई उसके लिए यह कितना मुश्किल है, आसपास के लोगों का उनके प्रति रिएक्शन क्या होता होगा, फिर भी इन्होंने उन सब की परवाह नहीं की और शुरू किया वर्मी कंपोस्ट का बिजनेस |

कैसे शुरू किया यह बिजनेस?

दोस्तों जब वे ट्यूशन पढ़ाती थी, तो उसमें से कुछ पैसे सेविंग कर के रखी थी लगभग एक से डेढ़ लाख रुपए सेविंग कर रखी थी और पैसे इन्होंने अपने माता और अपने भाई से कर्ज के तौर पर लिए और यह आश्वासन दिया कि वह जरूर कुछ अच्छा करेंगे और उन्होंने कर दिखाया पहले तो माता-पिता सपोर्ट नहीं करते थे लेकिन कभी मना भी नहीं किया कि क्यों कर रहे हो, अब सब इनके सपोर्ट करते हैं!

हमारे साथ भी यही होता है, कि अगर आप कुछ अलग करने की सोचो तो कोई भी गार्डियन नहीं चाहेगा कि उसका बच्चा इंजीनियरिंग करके खेती करें ! लेकिन अगर उन्हें रिजल्ट दिखेगा तो सपोर्ट जरूर करेंगे, इन्होंने वर्मी कंपोस्ट के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं ली उन्होंने जो भी बचपन से अब तक वर्मी कंपोस्ट के बारे में पढ़ा था कि किसी भी चीज को कैसे कंपोस्ट में बदला जाए, तो इसी के दम पर उन्होंने अपना बिजनेस शुरू कर दिया ,जब इन्होंने खेती करने के लिए सोची तो सबसे पहले उन लोगों से मिलना जुलना शुरू कर दिया जो लोग खेती करते थे, लेकिन इन्हें इस समय तक कोई आईडिया नहीं था कि क्या काम किया जाए और कैसे किया जाए धीरे-धीरे इनकी नेटवर्क बढ़ी और वर्मी कंपोस्ट में रुचि बढ़ी, तो इसी का बिज़नेस शुरू कर दिया !

यह काम कैसे करती है ?

वर्मी कंपोस्ट का एक ही तरीका है, वह है जमीन में सड़ी-गली चीजों को गाड़ देना और जब सब मिट्टी हो जाए तो खाद बन जाता है इन सब को देखते हुए उन्हें खुद का एक मेथड डिवेलप किया कि किस तरीके से काम करना है |

इनके काम करने का तरीका (मेथड)

सबसे पहले यह जमीन पर पन्नी बिछाती थी और चारों तरफ से ईंट लगाती थी लेकिन इनके एरिया में चोरी चकारी ज्यादा होती थी और ईंट भी चोरी हो जाती थे ! इसलिए इन्होंने ईंट का इस्तेमाल बंद कर दिया और जमीन में ही मिट्टी की मेड़ बनाकर उस पर काम करना शुरू कर दिया, शुरुआत में तो इन्होंने कोई मजदूर नहीं रखा सारा काम खुद करते थे पर जैसे-जैसे बिजनेस बढ़ता गया इन्होंने मजदूर रखने शुरू कर दी है और अब इनकी भाभी (रवीना) भी इनके साथ काम करती हैं कभी वह मार्केटिंग करती हैं तो कभी प्रोडक्शन का काम संभालती है, इन्होंने अपने खाद पर कोई लोगों नहीं लगाया है |

इनका मानना है कि किसानों के लिए  खाद मायने रखता है लोगों (Logo) नहीं, इनके खाद बड़े ही उच्च क्वालिटी के होते हैं इन्होंने क्वालिटी से कभी कंप्रोमाइज नहीं किया अगर आप इनका खाद मंगवाना चाहते हैं तो उनसे संपर्क कर सकते हैं |

संपर्क:- इन्होंने एक वेबसाइट लांच की है www.greenearthorganics.co.in आप चाहे तो इनके वेबसाइट के जरिए अपने लिए आर्डर कर सकते हैं अब हम आपको बताते हैं कि आप वर्मी कंपोस्ट का बिजनेस कैसे शुरू कर सकते हैं?

कैसे शुरू करें वर्मी कंपोस्ट का बिजनेस ?

दोस्तों इस बिजनेस को शुरू करने से पहले आपको इसके बारे में पूरा रिसर्च कर लेना है बिना रिसर्च के आप काम शुरु ना करें आप कहीं भी ऐसे शिक्षण केंद्र में जाएं जहां खेती के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है और उनमें जो भी किसान हैं आप उनसे मिलिए और अपना नेटवर्क बनाइए क्योंकि नेटवर्क से ही आपको आइडिया मिलेगा कि आपको कैसे काम शुरू करना है

वर्मी कंपोस्ट खाद कैसे बनता है ?

वर्मी कंपोस्ट एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सड़े गले चीजों फल, सब्जी, गोबर को मिट्टी में डालकर लंबे समय तक छोड़ा जाता है | उसके बाद जब सब मिट्टी में पूरी तरह से मिल जाता है तो यह एक उर्वरक बन जाता है ! यह प्रक्रिया बहुत लंबे समय तक चलती है ! इस प्रक्रिया को कम समय में करने के लिए किसान केंचुए के मदद  लेते हैं जितने भी ऑर्गेनिक खाद बनाकर बेचने वाले होते हैं वह केचुए की मदद से 40 से 50 दिनों में ही अच्छा खाद तैयार कर लेते हैं!

केंचुआ कैसे मदद करते हैं ? यह किसानों के मित्र कैसे हैं?

भारत में लगभग 500 से अधिक प्रकार के केचुए की प्रजाति पाई जाती है, केचुआ एक रेंगने वाला जीव है, यह जो भी खाता है, उसके पेट में जाने के बाद जब वह पच जाता है और मल के द्वारा बाहर आ जाता है, तो यही मल एक उर्वरक खाद का काम करती है | इसकी क्वालिटी इतनी अच्छी होती है कि खेत की उपजाऊ शक्ति बढ़ जाती है ! बाजार में मिलने वाले खाद से कई गुना बेहतर है इसलिए केंचुए को किसानों का मित्र भी कहा जाता है ! 

वर्मी कंपोस्ट के लिए क्या-क्या कच्चा माल चाहिए ?

वर्मी कंपोस्ट के लिए आपको कोई महंगी रॉ मैटेरियल खरीदने की जरूरत नहीं है, हां आप जहां पर यह काम करोगे उस जमीन का किराया लग सकता है, अगर जमीन अपना न हो तो | इसके साथ ही आपको एक मशीन की जरूरत पड़ सकती है जिसमें सभी रो मटेरियल को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाए, अब बात करते हैं इसके लिए रो मटेरियल की तो आपको इसके लिए इन चीजों की आवश्यकता पड़ेगी

  • गोबर
  • सड़ी गली सब्जी
  • मुर्गी का कचरा
  • पेड़ों की पत्तियां
  • बकरी का गोबर
  • होटल का बेकार खाना

और भी जो भी बेकार चीजें हैं इस पूरी तरह गलाया जा सकता है, वह सब चीजें चाहिए और साथ में केचुए भी चाहिए, क्योंकि बिना केचुए के कंपोस्ट खाद नहीं बना सकते हैं, जितना अधिक केचुआ होगा उतनी ही जल्दी आपका खाद तैयार होगा, आप केंचुओं के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं, जो पहले से कंपोस्ट खाद बना रहे हैं |

नोट:-  केचुआ खाद का उपयोग करने के बाद कोई भी रासायनिक दवा का छिड़काव ना करें!

वर्मी कंपोस्ट के फायदे

वर्मी कंपोस्ट खाद बनाने के वैसे तो बहुत से फायदे हैं लेकिन कुछ फायदे हम आपको बता रहे हैं जिन्हें आप नीचे के पॉइंट्स देख सकते हैं:-

  • कम लागत:- इसकी लागत बहुत ही कम होती है आपको दो रुपया किलो से भी कम में लागत पड़ेगा जिसे आप 5 रुपये प्रति किलो तक बेच सकते हैं और अधिक मुनाफा कमा सकते हैं !
  • उर्वरक क्षमता:- यह भूमि की उर्वरक क्षमता बढ़ाती है |
  • सिचाई:- इससे सिंचाई भी कम करनी पड़ती है |
  • कच्चा माल:- यह घर के ही सरें गले सब्जियों से भी बनाया जा सकता है |

निष्कर्ष:- दोस्तों मैं आशा करता हूँ कि आप पायल अग्रवाल जी के बिज़नेस टेक्निक को समझ पाए होंगे और आप खुद कैसे शुरू कर सकते हैं, वर्मी कंपोस्ट खाद इसकी आपको पूरी जानकारी मिल गई होगी | अगर आपको कोई दिक्कत आती है, तो आप कमेंट में बता सकते हैं |

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